चित्र-किताब “छोटी बत्तख़ का सपना”
लेखक और चित्रकार: सोइचिरो ताकाशिमा (एसेंशियल पब्लिशिंग, 2022)
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“काश, एक दिन मैं भी आसमान में उड़ पाती…”
छोटी बत्तख़ के पैरों की झिल्ली छोटी थी, इसलिए दौड़ में वह हमेशा सबसे पीछे रहती। पर उसे आसमान में उड़ने वाले पंछी बहुत अच्छे लगते थे।

सपना ज़ोर से बोलो, तो पूरा होता है
दोस्तों ने उसका मज़ाक उड़ाया: “बत्तख़ें उड़ नहीं सकतीं।” पर पापा ने हौसला बढ़ाया: “कोई ज़रूर आएगा जो तुम्हें तरीक़ा सिखाएगा।”

फड़-फड़ पंख फड़फड़ाओ
खेल के टीचर ने सिखाया: पंख फड़फड़ाओ! फड़-फड़, फड़-फड़। रोज़ अभ्यास किया, पर वह उड़ नहीं पाई।

हिम्मत करो! …सूँऽऽ, धड़ाम!
तानुकिचि दादाजी के “बस हिम्मत चाहिए!” पर भरोसा करके उसने ऊँचे पेड़ से छलाँग लगाई। वह गिरी और उसे चोट लग गई।

बस सोचने का तरीक़ा बदल लो
तालाब के किनारे वह रो रही थी, तब सुपर बू ने एक बात कही: “जो नहीं हो सकता, वह नहीं हो सकता। बस सोचने का तरीक़ा बदल लो!”

जेट इंजन?! …पर पैसे नहीं हैं
“जेट इंजन लगा लो, तो उड़ सकती हो!” पर दुकान में झटका लगा। इतना महँगा? ख़रीदने के पैसे ही नहीं थे।

क्राउडफ़ंडिंग
कंप्यूटर से उसने साथ देने वाले साथियों को बुलाया। पर पैसे जमा ही नहीं हो रहे थे। उफ़्फ़…

अपनी बात दिल से बताओ
“बताओ कि तुम उड़ना क्यों चाहती हो,” सुपर बू ने कहा। जब उसने अपनी मेहनत का लाइव वीडियो दिखाया, तो साथी बढ़ते ही गए।

आसमान में उड़ान!
आख़िरकार उसने जेट इंजन ख़रीद लिया। “छोटी बत्तख़, तुम कर सकती हो!” …और वह उड़ी! यह एक शानदार अनुभव था।

दुनिया देखो, कंपनी बनाओ
पूरी दुनिया देखकर छोटी बत्तख़ ने ऐसे पंछियों और जानवरों के लिए कंपनी बनाई, जो उड़ नहीं सकते।

स्कूल बनाओ
कमाए हुए पैसों से उसने एक स्कूल बनाया, जहाँ सब मिलकर अपने सपने पूरे करते हैं। जन्म लेना कितना अच्छा है!
सात बार गिरो, आठ बार उठो
नाकामी 4 बार। हर बार उसने तरीक़ा बदला, साथियों ने मदद की, और सपना पूरा हुआ।
- फड़-फड़ अभ्यास→ उड़ नहीं पाई
- हिम्मत से छलाँग→ चोट
- पैसे नहीं→ क्राउडफ़ंडिंग
- पैसे जमा नहीं हुए→ अपनी बात दिल से बताई
समाप्त
बड़ों के लिए: सोइचिरो ताकाशिमा आधिकारिक फ़ैन साइट (बड़ों के लिए)
यहाँ है(नए टैब में खुलेगी)। इस चित्र-किताब की तस्वीरें और शब्द लेखक सोइचिरो ताकाशिमा की रचना हैं।

